
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभागीय शुल्क नियामक समितियों को फिर से कार्यान्वित कर दिया गया है। ‘महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्था (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2011’ के तहत राज्य और विभागीय स्तर पर अध्यक्ष व पदसिद्ध सदस्य सचिवों की नियुक्तियां अधिसूचना के जरिए जारी कर दी गई हैं।
अब स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर पालक सीधे संबंधित समिति में शिकायत दर्ज कर राहत मांग सकेंगे।
स्कूलों पर सूचना लगाने का बंधन
शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को आदेश दिया है कि वे विभागीय शुल्क नियामक समिति की जानकारी, संपर्क नंबर और शिकायत प्रक्रिया स्कूल के सूचना पटल या दर्शनी भाग में स्पष्ट रूप से लगाएं। ताकि हर पालक को पता हो कि शिकायत कहां और कैसे करनी है।
हर साल 10 से 30% तक बढ़ रही फीस
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार निजी स्कूलों में हर साल औसतन 10 से 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई जा रही है। कई जिलों में निजी स्कूलों की सालाना फीस लाखों में पहुंच गई है, जो आम पालकों के बजट से बाहर हो रही है। बढ़ते शैक्षणिक खर्च को लेकर अभिभावकों में चिंता है।
शिकायत कहां करें?
फीस बढ़ोतरी से परेशान पालक अपने जिले/विभाग की विभागीय शुल्क नियामक समिति के पास लिखित शिकायत दे सकते हैं। शिकायत संबंधित विभागीय शिक्षण उपसंचालक कार्यालय या समिति द्वारा तय आधिकारिक पते पर दर्ज कराई जा सकती है।
पालकों को मिला हक
अब तक निजी स्कूलों की मनमानी के आगे पालक बेबस थे। लेकिन समितियां सक्रिय होने से अब शुल्कवाढ के खिलाफ सीधे दाद मांगने का रास्ता खुल गया है। शिक्षा विभाग का दावा है कि इससे मनमानी फीस पर अंकुश लगेगा और पारदर्शिता आएगी।
स्कूलों की मनमानी पर कौन लगाएगा चाबुक?
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि समिति की जानकारी छिपाने वाले स्कूलों पर भी कार्रवाई होगी। सभी निजी स्कूलों को अनिवार्य रूप से समिति का बोर्ड लगाना होगा, वरना नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।







